✍️आज के दौर में Artificial Intelligence (AI) केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह शासन, अर्थव्यवस्था और नागरिक जीवन के हर पहलू को प्रभावित करने वाला एक शक्तिशाली उपकरण बन चुका है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में, AI का उपयोग विशेष रूप से कर प्रशासन (tax governance) और सार्वजनिक सेवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बदलाव वास्तव में “स्मार्ट गवर्नेंस” की ओर ले जा रहा है, या फिर यह धीरे-धीरे एक “निगरानी राज्य” (surveillance state) की नींव रख रहा है?
✒️AI और कर प्रशासन: एक नई क्रांति
◾भारत में कर-प्रणाली लंबे समय से दो बड़ी चुनौतियों से जूझती रही है—कम टैक्स-टू-GDP अनुपात और उच्च कर चोरी (tax evasion)। इस समस्या के समाधान के लिए आयकर विभाग ने Project Insight जैसे AI-आधारित प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर डेटा विश्लेषण के माध्यम से करदाताओं की वित्तीय गतिविधियों का आकलन करना और कर चोरी को पहचानना है।
✒️AI के उपयोग से कर प्रशासन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं—
◾सटीक जोखिम मूल्यांकन (Risk Profiling):
AI करदाताओं के व्यवहार का विश्लेषण कर संभावित कर चोरी की पहचान करता है।
◾प्रशासनिक दक्षता (Efficiency):
रूटीन कार्यों के स्वचालन से अधिकारियों को जटिल मामलों पर ध्यान देने का समय मिलता है।
◾स्वैच्छिक अनुपालन (Voluntary Compliance):
NUDGE जैसे उपायों के माध्यम से करदाताओं को सुधार का अवसर मिलता है।
◾राजस्व में वृद्धि:
AI के कारण अतिरिक्त कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
🟠स्पष्ट है कि AI कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की क्षमता रखता है।
✒️ AI के खतरे
◾हालांकि AI के लाभ आकर्षक हैं, लेकिन इसके साथ कई गंभीर चिंताएँ भी जुड़ी हुई हैं—
1. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा
◾AI सिस्टम बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा पर निर्भर होते हैं। यदि यह डेटा निजी कंपनियों या असुरक्षित प्रणालियों के हाथ में चला जाए, तो यह निजता (privacy) और डेटा संप्रभुता (data sovereignty) के लिए खतरा बन सकता है।
2. एल्गोरिदमिक पक्षपात (Algorithmic Bias)
◾AI मॉडल अक्सर ऐतिहासिक डेटा पर आधारित होते हैं। यदि उस डेटा में सामाजिक या आर्थिक असमानताएँ मौजूद हैं, तो AI उन पूर्वाग्रहों को और बढ़ा सकता है। इससे कुछ वर्गों या क्षेत्रों को अनुचित रूप से अधिक जांच का सामना करना पड़ सकता है।
3. पारदर्शिता और जवाबदेही (Transparency & Accountability)
◾AI के निर्णय अक्सर “ब्लैक बॉक्स” की तरह होते हैं, जिन्हें समझना आम नागरिक के लिए मुश्किल होता है। यदि किसी करदाता को गलत तरीके से चिन्हित किया जाता है, तो उसे यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ।
4. मानव हस्तक्षेप की कमी
◾AI पर अत्यधिक निर्भरता से “मानवीय निर्णय” (human judgment) का महत्व कम हो सकता है, जिससे गलत निर्णयों की संभावना बढ़ जाती है।
✒️AI और शासन: सीमाएँ कहाँ तय हों?
◾सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि AI का उपयोग कहाँ तक उचित है। AI को हर समस्या का समाधान मान लेना एक खतरनाक सोच हो सकती है।
◾उद्देश्य की स्पष्टता जरूरी है: AI को अपनाने से पहले यह तय होना चाहिए कि समस्या क्या है और क्या AI वास्तव में उसका सबसे उपयुक्त समाधान है।
◾आवश्यकता और अनुपात (Necessity & Proportionality): हर जगह AI का उपयोग करना जरूरी नहीं है।
◾कम से कम हस्तक्षेप का सिद्धांत: यदि कम आक्रामक विकल्प उपलब्ध हैं, तो उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
🟠COVID-19 के दौरान कुछ AI टूल्स ने मेडिकल डेटा विश्लेषण में मदद की, लेकिन वहीं फेसियल रिकग्निशन जैसी तकनीकों ने निजता पर सवाल खड़े किए।
✒️निजी कंपनियाँ और सरकार: साझेदारी या निर्भरता?
◾आज अधिकांश AI तकनीकें बड़ी वैश्विक कंपनियों के नियंत्रण में हैं। यदि सरकारें इन कंपनियों पर अत्यधिक निर्भर हो जाती हैं, तो यह डिजिटल संप्रभुता (digital sovereignty) के लिए खतरा बन सकता है।
◾इससे डेटा नियंत्रण निजी हाथों में चला सकता है
◾लंबी अवधि की निर्भरता पैदा हो सकती है
◾नीतिगत स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है
🟠इसलिए, भारत को अपनी स्वदेशी AI क्षमता (indigenous capability) विकसित करने पर जोर देना चाहिए।
✒️अंतरराष्ट्रीय अनुभव: क्या सीखें?
◾ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों ने AI का सफल उपयोग कर राजस्व बढ़ाया है। लेकिन वहीं नीदरलैंड्स का childcare benefits scandal यह दिखाता है कि गलत AI उपयोग से निर्दोष नागरिकों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
◾इससे स्पष्ट है कि AI एक “डबल-एज्ड स्वॉर्ड” है—यह लाभ भी दे सकता है और नुकसान भी।
✒️आगे की राह
◾AI के प्रभावी और सुरक्षित उपयोग के लिए भारत को निम्नलिखित कदम उठाने होंगे—
1. मजबूत कानूनी ढांचा
◾डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और AI उपयोग के लिए स्पष्ट कानून होने चाहिए।
2. मानव-केन्द्रित AI (Human-in-the-loop)
◾हर महत्वपूर्ण निर्णय में मानव हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
3. AI ऑम्बड्समैन की स्थापना
◾नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिए एक स्वतंत्र संस्था होनी चाहिए।
4. पारदर्शिता और जवाबदेही
◾AI के निर्णयों को समझने योग्य और चुनौती देने योग्य बनाया जाना चाहिए।
5. स्वदेशी तकनीकी विकास
◾भारत को अपने AI मॉडल, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च क्षमता को मजबूत करना होगा।
✒️निष्कर्ष
◾AI भारत के लिए एक बड़ा अवसर है—यह शासन को अधिक कुशल, पारदर्शी और उत्तरदायी बना सकता है। लेकिन यदि इसे बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अपनाया गया, तो यह नागरिक स्वतंत्रता, निजता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बन सकता है।

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